मनामा: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ईरान को लेकर अमेरिका का मौजूदा रवैया पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता कायम करने में मददगार नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्रीय संकटों का समाधान निकालने के लिए उनके मूल कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, लावरोव ने कहा कि रूस खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के साथ करीबी सहयोग बनाए रखने को महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने उन क्षेत्रीय मध्यस्थों के प्रयासों का भी स्वागत किया, जो तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए काम कर रहे हैं।
रूसी विदेश मंत्री ने बताया कि बहरैन की राजधानी मनामा में रूस और खाड़ी सहयोग परिषद के बीच हुई रणनीतिक बातचीत के दौरान यमन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। रूस और उसके खाड़ी क्षेत्र के साझेदार इस संकट के समाधान के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
अल मयादीन के मुताबिक, लावरोव ने कहा कि रूस और खाड़ी देश सऊदी अरब तथा यमन जनांदोलन अंसारुल्लाह के बीच विवाद का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना जरूरी है।
लावरोव ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया की स्थिति व्यापक युद्ध की दहलीज तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि हुर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद की जड़ों को समझकर उनका समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ यह दस्तावेज जलडमरूमध्य की स्थिति को दोबारा कूटनीतिक रास्ते पर लाने के लिए जरूरी आधार प्रदान करता है।
हुर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
लावरोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़्ज़ा योजना की आलोचना करते हुए कहा कि यह अभी तक कागजों तक सीमित है। उनके मुताबिक, इस पहल में बताए गए सिद्धांतों को जमीन पर लागू नहीं किया गया है।
रूसी विदेश मंत्री ने एक बार फिर कहा कि क्षेत्रीय समस्याओं का स्थायी समाधान सैन्य टकराव के बजाय बातचीत, कूटनीति और संकटों के मूल कारणों को दूर करने से ही संभव है।
आपकी टिप्पणी